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Wednesday, January 30, 2008

Blog : Your online journal

एक समय था जब लोग अपनी रचनाओ को लिख कर पत्रिकाओ और समाचार पत्र के संपादक को भेजा करते थे और महीने भर बाद अगर आपका लेख संपादक को पसंद आता तो उसे छापा हुआ देखना नसीब होता था। पर अब समय कितना बदल चूका है। अब आप लिखने के शौकीन हो तो बस अपना (blog) बनाइये और जो चाहे लिख कर उसे ब्लोग पर छाप दीजिए । ना तो किसी कि पसंद या नापसंद कि फिक्र न ही कोई इंतज़ार । मैंने भी जब लोगों को ब्लोग बनाते और लिखते हुए देखा तो सोचा क्यो न मैं भी अपना ब्लोग बनाऊ और मैं भी शुरू हो गयी। और आज लिखते हुए कितना सुकून मिलता है। ब्लॉगर जो कि गूगल का ही एक हिस्सा है उसमे कितनी सुविधा हो गयी है। दुनिया कि हर मुख्य भाषा मे ब्लोग बनाए जा सकते है और लिखना भी बहुत आसान । पहले पहल तो मुझे हिन्दी मे लिखने के लिए अंग्रेजी के शब्दों को लिखने मे कुछ दिक्कत हुई पर चूँकि हिन्दी मे संक्षिप्त संदेश भेजने के लिए अंग्रेजी का जैसे इस्तेमाल करती थी वैसे ही इसमे करते हुए कोई कठिनाई नही हुई। चिटठा और चिट्ठाकारिता हुआ कितना आसान ! मैं गूगल और सभी चिट्ठाकारों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिनसे प्रेरित होकर मुझे भी ब्लोग बनने कि सूझी और एक नयी शुरुआत हुई। हिन्दी चिट्ठाकारिता से मुझे लगता है कि कई ऐसे लोग है जिनमे कई नए लेखकों का जन्म होगा और हिन्दी रचना जगत मे हिन्दी का और भी विकास होगा
जल्द ही फिर मिलती हूँ

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