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Thursday, January 31, 2008

Blogger Buzz: Now you can blog in Hindi

Hi friends, this is a very great news to share with you. Now one can easily create a blog in Hindi also. www.blogger.com owned by google has offered a special transiliteration feature which enables a blogger to blog in Hindi. Thanks to blogger and see i have created a blog in Hindi.
Blogger Buzz: Now you can blog in Hindi

Uses of Microwave माइक्रोवेव के उपयोग

आज के ज़माने मे माइक्रोवेव किचेन कि शोभा बढ़ा रह है । शहरो मी तो माइक्रोवेव का चलन कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। हो भी क्यो न ! माइक्रोवेव के उपयोग भी तो बहुत सारे हैं । अगर सर्वे किया जाये तो अधिकतर घरों मे माइक्रोवेव का इस्तेमाल अधिकतर खाना गर्म करने या हल्का फुल्का पकाने तक ही सीमित है लेकिन इसके अन्य भी कई उपयोग है । चलिए आज इसिस विषय पर बात करते है और इसके अन्य उपयोगों के बारे मी जानते हैं।

मलाई से घी निकालना :
एक माइक्रोवेव सुरक्षित बोव्ल ले उसमे मलाई को आधा भरें । इसे बिना ढके माइक्रोवेव १००% पॉवर पर १०-१२ मिनट के लिए रखे । मलाई उबलते उबलते घी मे परिवर्तित हो जायेगी । खोया इस्तेमाल करना हो तो छान कर अलग निकाल ले अथवा उसे फ़ेंक दे। कुछ बातों का ख़याल रखे कि बोव्ल मे मलाई को आधा से ज्यादा न भरे अथवा मलाई उफन कर बाहर गिर सकती है। मलाई मे दूध ना हो नही तो समय अधिक लगेगा।

आलू अथवा अन्य सब्जी को उबालना : माइक्रोवेव मे आलू या अन्य कोई सब्जी उबालना अत्यंत ही आसान है। वो भी बिना पानी के ! जी हाँ ! आलू, शकरकंदी, मटर, आदि को आप माइक्रोवेव सुरक्षित बोव्ल मे अथवा पालीथीन मे रख कर आसानी से उबाल सकते हैं । सब्जी या आलू पालीथीन या बोव्ल मे रख कर माइक्रोवेव १००% पॉवर पर ४ से ६ मिनट का समय दे। छिलके वाली सब्जी जैसे आलू, बैगन, शकरकंदी आदि उबाल रहें हो तो उसमे चाकू से २-३ जगह गोद दे जिससे कि वो फटे नही।

आटा, सूजी, दलिया, बेसन, सौफ, मखाना, काजू, मूंगफली, लाई, चिवडा आदि को भूनना :
उपरोक्त मे से किसी भी चीज़ को भूनना हो तो उसे माइक्रोवेव सुरक्षित बोव्ल मे रखकर बिना ढके माइक्रोवेव १००% पॉवर पर ४-६ मिनट का समय दे । बीच मे २-३ बार चला दे। आटा, बेसन, सूजी को भूनने मे ६-७ मिनट लगता है बाकी अन्य चीजे ३ से ४ मिनट मे भुन जाती है। सूजी आटा बेसन को भुनते समय बीच मे ज़रूर चलाये अन्यथा वे बीच मे जल जाएँगी।

defrost करना : फ्रीज़र मे से निकाले गए जमे हुए चीजों को सामान्य तापमान मे लाने को देफ्रोस्तिंग (defrosting) करना कहते है । सामान्यतः माइक्रोवेव मे ऑटो दिफ्रोस्त का फीचर होता जिसमे ४-५ चीजो के लिए आपको समय और पॉवर डालने कि आवश्यकता नही पड़ती है पर अन्य चीजे जैसे मटर, पनीर, आदि को defrost करना हो तो माइक्रोवेव ४०% से अधिक पॉवर का प्रयोग ना करे । defrost करने के लिए ३ - से ८ मिनट का समय दीजिए । जो भो समय आपने defrost के लिए डाला हो उसके बीच मे एक बार उसे पलट अवश्य दे। कभी भी defrost करने के लिए माइक्रोवेव कि पूरी पॉवर का इस्तेमाल न करे।

पापड़, चिप्स आदि को सेकना :
माइक्रोवेव मे पापड़ को बिना घी तेल के भूना जा सकता है। पापड़ को माइक्रोवेव की कांच कि प्लेट मे रखें एवं माइक्रोवेव १००% पॉवर पर ३० सेकंड से एक मिनट का समय दे। एक साथ १०-१५ पापड़ भूनने हो तो बीच मे उसे पलट दे। यदि घी वाले पापड़ का स्वाद चाहते हो तो पापड़ मे माइक्रोवेव मे रखने से पहले ही घी लगा दे। पापड़ मे चटनी , सास् का लेप लगा कर आप अलग अलग स्वाद का आनंद ले सकते है।

पोप्कोर्न (Popcorn) बनाना :
पोप्कोर्न बनने के लिए मक्के के दाने को माइक्रोवेव सुरक्षित बोव्ल मे रखे, मक्खन एवं मसाले डाल दे एवं ढक कर माइक्रोवेव १००% पॉवर पर ३ से ५ मिनट का समय दे।

नम हो गए बिस्किट या दालमोठ को कुरकुरा करना :
बिस्किट, चुरा, लाई, दालमोठ आदि को कुरकुरा करना इसे माइक्रोवेव के अन्दर कांच की प्लेट पर फैला दे एवं २ से ३ मिनट के लिए ग्रिल कर दे । ठंडा होने पर वे कुरकुरे हो जायेंगे ।

माइक्रोवेव को होट केस ( Hot Case ) की तरह इस्तेमाल करना :
बहुत कम लोग जानते होंगे की माइक्रोवेव को होट केस की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है ।आप इसमे खाने को जबतक चाहे गर्म रख सकते हैं। जिस भी चीज़ को गर्म रखना हो उसे पहले गर्म कर ले और फिर माइक्रोवेव की सबसे कम १०% या २०% पॉवर पर जितने समय तक गर्म रखना हो समय डाल कर ओन कर दे। खाना तबतक गर्म रहेगा ।

Wednesday, January 30, 2008

Blog : Your online journal

एक समय था जब लोग अपनी रचनाओ को लिख कर पत्रिकाओ और समाचार पत्र के संपादक को भेजा करते थे और महीने भर बाद अगर आपका लेख संपादक को पसंद आता तो उसे छापा हुआ देखना नसीब होता था। पर अब समय कितना बदल चूका है। अब आप लिखने के शौकीन हो तो बस अपना (blog) बनाइये और जो चाहे लिख कर उसे ब्लोग पर छाप दीजिए । ना तो किसी कि पसंद या नापसंद कि फिक्र न ही कोई इंतज़ार । मैंने भी जब लोगों को ब्लोग बनाते और लिखते हुए देखा तो सोचा क्यो न मैं भी अपना ब्लोग बनाऊ और मैं भी शुरू हो गयी। और आज लिखते हुए कितना सुकून मिलता है। ब्लॉगर जो कि गूगल का ही एक हिस्सा है उसमे कितनी सुविधा हो गयी है। दुनिया कि हर मुख्य भाषा मे ब्लोग बनाए जा सकते है और लिखना भी बहुत आसान । पहले पहल तो मुझे हिन्दी मे लिखने के लिए अंग्रेजी के शब्दों को लिखने मे कुछ दिक्कत हुई पर चूँकि हिन्दी मे संक्षिप्त संदेश भेजने के लिए अंग्रेजी का जैसे इस्तेमाल करती थी वैसे ही इसमे करते हुए कोई कठिनाई नही हुई। चिटठा और चिट्ठाकारिता हुआ कितना आसान ! मैं गूगल और सभी चिट्ठाकारों को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिनसे प्रेरित होकर मुझे भी ब्लोग बनने कि सूझी और एक नयी शुरुआत हुई। हिन्दी चिट्ठाकारिता से मुझे लगता है कि कई ऐसे लोग है जिनमे कई नए लेखकों का जन्म होगा और हिन्दी रचना जगत मे हिन्दी का और भी विकास होगा
जल्द ही फिर मिलती हूँ

Monday, January 28, 2008

Agony of maid servants काम वाली बाई का दर्द

एक औरत जिसके बिना शायद घर का काम अधूरा ही लगता है। जी हाँ काम वाली बाई। एक दिन भी काम वाली न आये तो बर्तन धोने झाडू पोछा करना मुश्किल हो जाता है। आदत नही होती ये सब करने कि या अचानक करना पड़े तो कुछ महिलाओ को नानी याद आ जाती है। मैं ऐसी कई महिलाओ को जानती हूँ जिन्हें काम वाली बाई का एक दिन भी नागा करना स्वीकार नही। बाई के आने के टाइम से थोडा ऊपर हुआ नही कि दरवाजे से झांक कर रह देखना शुरू हो जाता है । अगर अगल बगल कोई दिखाई पड जाये तो फौरन पूछने से चूकती नही " सुनिए बहन जी आज काम वाली बाई नही आई, पता नही कहाँ रह गयी मेरे तो सारे बर्तन जूठे पड़े है। इनका कोई ठिकाना नही, कोई टाइम नही" अगर बगल वाली ने यह कह दिया कि हां आयी है तब खुश होकर अन्दर चली जाएँगी । अगर कह दिया कि नही आयी है तब पैर पटकते, बुदबुदाते हुए घर के अंदर जाती है । अब साहब जब दूसरे दिन काम वाली बाई जैसे ही घर मे घुसी और इससे पहले कि वो कुछ बोलती उसके ऊपर प्रश्नों कि बौछार शुरू हो जाती है। " ये क्या तरीका है ? कल क्यों नही आई ? नही आना था तो खबर तो कर देती। ऐसे नही चलेगा। गुस्से मे अगर बाई कह दे कि ठीक है कोई दूसरी बाई देख लो तो उनका सारा गुस्सा काफूर हो जाता है। शायद ये स्थिति भारत मे आम है। काम वाली बाई के बिना महिलाओ का घर संभाल पाना नामुमकिन सा लगता है। पर कहते है महिला ही महिला कि दुश्मन होती है । उसे दूसरे का दर्द या तकलीफ नही दिखाई देती । क्या काम वाली बाई इंसान नही होती। क्या उसे किसी काम से कही जान नही होता? क्या उसे बिमारी नही आती? या उसके घर मे कोई बीमार नही होता? निम्न वर्ग कि गरीब महिलाओ कि इस दर्द को कोई जल्दी नही समझ पाता। वो हमारे घर मे आती है काम करती है और चुप चाप चली जाती है । उनके होने का एहसास हमे तब होता है जब वो काम पर नही आती है।

काश हम महिलाए भी काम वाली बाई को एक महिला और इंसान कि नज़र से देख पाते । अगर हम महिलाए भी उनके जीवन मे झांके तो वो भी बिल्कुल हम महिलाओ कि तरह ही होती है। उनका भी परिवार होता है, बच्चे होते है, उन्हें भी सबकी तरह अपने घर कि देखभाल और जिम्मेदारी होती है। उनको भी बिमारी आ सकती है । शायद उनको सम्मान और इज्ज़त देकर हम उनके होठों पर मुस्कराहट ला सकते है।

Bravo

I have just created my own blog. Hi friends ! How are you. Don't know what to write ... so keep coming and checking what i will write. I have a lot to write.... so i am going to collect all my things to write... see you...